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HINDI MOTIVATIONAL STORIES | HINDI KAHANIYAN

आने वाले कल की उपलब्धियों की राह में केवल एक बाधा है, और वे हैं हमारे आज के संदेह  - फ्रैंकलिन डी रूज़वेल्ट   HINDI MOTIVATIONAL STORIES , HINDI KAHANIYAN, BESTMOTIVATIONAL STORY FOR STUDENT, BEST MOTIVATIONAL STORIES, HINDI ME KAHANIYAN, HINDI STORY  1. भोजन मुफ्त में नहीं मिलता  एक राजा ने अपने सलाहकारों को बुला कर उनसे बीते हुए इतिहास और उनके पूर्वजों की वीरता की सारी समझदारी भरी बातें लिखने के लिए कहा , ताकि आने वाली पीढ़ियों को उससे कुछ सीख मिले और वो बाते उनको प्रेरित कर सक।  तो उन सभी ने काफी मेहनत से कई किताबें लिखी और उन्हें राजा के सामने पेश किया।  राजा को वो किताबे काफी भरी भरकम लगी।  उसने उन सलाहकारों से कहा की लोग इन्हे पढ़ नहीं पाएंगे, इसलिए इन्हे छोटा करो। सलाहकारों ने फिर काम किया मेहनत की और सभी किताबों से कुछ कुछ बातों को लेकर एक किताब बनाई , और उसे लेकर राजा के पास पहुंचे। राजा को वह भी काफी मुश्किल लगी।  सलाहकारों ने उसे और छोटा किया और इस बार वे केवल एक CHAPTER लेकर आये। राजा को वह भी काफी लम्बा लगा।  तब सलाहकार...

सफलता की हर कहानी महान असफलताओं की भी कहानी है EVERY SUCCESS STORY IS ALSO A STORY OF GREAT FAILURE | Hindi Motivational Stories

motivational stories, Inspiring Stories,Daily Motivation Hindi, Safalta ki kahani, hindi motivational story, This is the best motivational story in hindi सफलता की हर कहानी महान असफलताओं की भी कहानी है EVERY SUCCESS STORY IS ALSO A STORY OF GREAT FAILURE | Hindi Motivational Stories असफलता सफलता हासिल करने का राजमार्ग है। सफलता का रास्ता  असफलता से होकर ही गुजरता है।  अगर कोई व्यक्ति बोले की  वह कभी भी असफल नहीं हुआ है तो इसका मतलब साफ़ है की वह झूट बोल रहा है। I.B.M के टॉम वाट्सन का कहना है कि  " अगर आप सफल होना चाहते हैं , तो अपनी असफलता की दर दुगुनी कर दीजिये। " अगर हम इतिहास पढ़ें , तो पाएंगे की  सफलता की हर कहानी के साथ महान असफलता भी जुडी हुयी है।  लेकिन लोग उन असफलताओं पर ध्यान नहीं देते। वे केवल नतीजों को देखते हैं , और सोचते हैं की उस  आदमी  ने क्या किस्मत पायी है , "वह सही वक़्त पर, सही जगह रहा होगा " एक आदमी की जिंदगी की कहानी बड़ी मशहूर है यह आदमी 21 साल उम्र में BUSINESS में FAIL हो गया , 22 साल की उम्र में एक चुनाव हार गय...

Chaiwala & Author of 25 Books | Hindi inspirational story

मन में जिनके विश्वास होता  है  वही ज़माने में नाम करते हैं , जिनके होंसले होते हैं बुलंद  वह लोग अक्सर बड़े काम करते हैं।  ऐंसी ही कुछ कहानी है लक्मण राव जी की, जिन्होंने लोगों को चाय पिलाते पिलाते लिख डाली 25  किताबें और बहुत से अवार्ड और सम्मान के साथ आज चायवाला के साथ २५ किताबों के लेखक भी हैं।  बहुत सारे बिदेशी  newspaper के headline  भी बन चुके हैं।  यूरोप में बहुत सारे  newspaper  में इनके  बारे में आर्टिकल भी छपे हैं।  Laxman  Rao  जी का जन्म  22 July 1952 को तालेगांव दशासर अमरावती महाराष्ट्र में एक गरीब परिवार में  हुआ था।  बचपन से ही इनकी पढ़ाई में काफी रूचि थी. जब ये  सातवीं आठवीं कक्षा में थे तो उस समय इनके गांव के काफी सारे दोस्त शहर  में पढ़ते थे और जब वे छुट्टी में  घर आते थे तो कुछ किताबे और उपन्यास (NOVAL)  भी साथ में लाते थे,तो लक्मण राव जी उन्हें मांगकर वो साहित्य पड़ते थे।  उस समय में गुलसन नंदा जी के उपन्यास  काफी प्रसिद्ध थे, तो उनके...

Elon Musk से सोचना सीखो | 5 Best Advise For Youth

सबसे पहली चीज ये है की अगर आप एक कंपनी  स्टार्ट कर रहे  हो तो आपको बहुत ज्यादा हार्ड वर्क  करना पड़ेगा।  बहुत ज्यादा हार्ड वर्क से क्या मतलब होता है ? Elon  Musk ने  कहा  " जब मेने और मेरे भाई ने अपनी पहली कंपनी सुरु की थी तो हमने तो हमने एक घर लेने  की बजाय एक छोटा सा ऑफीस किराया पर लिया था।  हम सोफे पर सोते थे।  न्यूयॉर्क के सरकारी बाथरूम में नहाते थे। हमारे पास सिर्फ एक ही कंप्यूटर था। हमारी वेबसाइट दिन भर ऑनलाइन रहती थी और मैं रात भर कोडिंग करता था हफ्ते में साथ दिन हमेशा , तो अगर आप एक कंपनी सुरु कर रहे हो तो जम कर मेहनत करो , चाहे कुछ भी हो जाये। थोड़ा हिसाब लगाओ।  अगर कोई इंसान हफ्ते में पचास घंटे काम कर रहा है  और आप १०० घंटे काम कर रहे हो।  तो जितना वो एक साल में achieve करेगा वो आप ६ महीने में ही कर लोगे। दूसरी चीज अगर आप एक बिज़नेस सुरु कर रहे हो या कोई कंपनी ज्वाइन कर रहे हो सबसे important ये है की आप महान लोगो को अट्रेक्ट करो तो ऐंसे लोगो के साथ रहो या  ऐंसे लोगो का ग्रुप ज्वाइन करो जो अमेज...

एक कार्टून शो जो मनुष्य के जूनून और मेहनत की मिसाल बना

यदि आप किसी के दिल तक पहुँचना चाहते हैं तो आप उसे हंसाइए। और हमारे जीवन में कार्टून यही काम करते हैं। अपनी विभिन्न मुद्राओं से ये हंसी सी बिखेर देते हैं। कार्टून जगत के सरताज "टॉम एंड जैरी" एक ऐसी सीरीज है जिसने अपने दर्शकों का हंसा-हंसाकर उनका मन जीत लिया है। हालाँकि आज कार्टून सीरीज की कोई कमी नहीं है लेकिन "टॉम एंड जैरी" की एक अलग ही पहचान है और पिछले करीब सात दशकों से ये हमारे जीवन का एक अभिन्न हिस्सा बन गया है। हर उम्र का व्यक्ति इसका दीवाना बन चुका है।  साल 1940 में "टॉम एंड जैरी" कार्टून सीरीज को अमेरिका के William Hanna और Joseph Barbera ने मिलकर बनाया था। यही वो कार्टून है जिसका आनंद पीढ़ी दर पीढ़ी ले रही है। ये वो समय था जब कम्प्यूटर्स नहीं होते थे और एक-एक एनीमेशन को बनाने में चित्रकारों और फिल्मकारों को दिन रात एक करके मेहनत करनी पड़ती थी। यह सीरीज मुख्य रूप से दो चरित्रों - टॉम जो की एक बिल्ला है और दूसरा जैरी एक चूहा है, के इर्द गिर्द घूमती है।  इसकी कहानी में अधिकतर इन दोनों की प्यारी सी नोंक-झोंक को एक कॉमेडी के रूप में दिखाया जाता है।...

दिल्ली की एक मामूली सी बरसाती में जन्मी भारत की मशहूर इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी कंपनी

कामयाब लोग अपने फैसलों से दुनियाँ बदलने की ताक़त रखते हैं, वहीँ नाकामयाब लोग अपने फैसले बदलते रह जाते हैं। कुछ ऐसे ही अडिग इरादों के साथ अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भारत की छवि निखारने में देश के मशहूर उद्यमी और HCL ग्रुप के संस्थापक शिव नाडर सफल हुए हैं। आज इन्हीं के अथक प्रयास से भारत कंप्यूटर जगत में अपनी एक ख़ास जगह बना पाया है। साल 1975 की बात है जब दिल्ली की डीसीएम् कंपनी के कैलकुलेटर डिवीज़न के कुछ युवा इंजीनियरों ने अपने कैंटीन में बैठे बैठे काम से सम्बंधित समस्याओं पर चर्चा करते हुए एक ऐसा फैसला लिए जिसने आगे चलकर समूचे देश की तक़दीर ही बदल कर रख दी। ये सभी इंजीनियर अपनी नौकरी से संतुष्ट नहीं थे और इनका मन कुछ नया करने के लिए इन्हें झकझोर रहा था।  जिस व्यक्ति ने इस विचार को जन्म दिया उनका नाम था शिव नाडार। यही वे व्यक्ति हैं जिन्होंने दिल्ली के एक मामूली से बरसाती से शुरुआत कर आज कंप्यूटर जगत में अपनी साख बनाई है। अपने पांच घनिष्ट मित्रों सर्वश्री अर्जुन मल्होत्रा, अजय चौधरी, योगेश वैद्य, एस रमन, महेंद्र प्रताप और सुभाष अरोरा के साथ कंधे से क...

60% शारीरिक विकलांगता के बावजूद बनी IAS अधिकारी : Nothing is impossible

"मंज़िलें चाहे कितनी भी ऊंची क्यों न हों, रास्ते हमेशा हमारे क़दमों तले ही होते हैं" - इस प्रेरक प्रसंग से प्रेरित होकर इरा सिंघल ने अपनी शारीरिक विकलांगता को हराते हुए जीवन की बुलंदियों को छू लिया है। इरा सिंघल पहली ऐसी महिला हैं जो शारीरिक रूप से 60% विकलांग होते हुए भी साल 2014 की UPSC की परीक्षा में प्रथम स्थान पर रहीं। यूं तो UPSC द्वारा आयोजित सिविल सर्विसेस की परीक्षाओं की passing percentage बमुश्किल 0.30% ही हो पाती है लेकिन जिनके हौसले बुलंद होते हैं, सफलता उन्हीं के क़दम चूमती है। साल 2014 की UPSC की परीक्षा की नतीजे कुछ ख़ास थे क्योंकि इसके पहले चार स्थानों में महिलाओं ने ही बाज़ी मारी थी और उससे भी विशेष बात ये थी की पहले स्थान पर आने वाली महिला शारीरिक रूप से 60% विकलांग थी। ये थीं मेरठ की इरा सिंघल जिन्होंने ये साबित कर दिखाया की मेहनत और बुलंद हौसलों की आगे विकलांगता भी अपने घुटने टेक देती है। इरा को अपनी विकलांगता की कारण कई कठिनाईओं का सामना करना पड़ा लेकिन उन्होंने कभी भी हार नहीं मानी। रीढ़ की हड्डियों की गंभीर बिमारी Scoliosis से जूझती इरा कभी डॉ...

संगीत के क्षेत्र में भारत को पहली बार दिलाया ऑस्कर पुरस्कार

अपनी शास्त्रीय पद्धिति के कारण भारतीय संगीत का दबदबा विश्व विख्यात है। साथ ही हमारे संगीतकारों ने अपनी रचनाओं द्वारा अपनी एक अलग पहचान भी बनाई है। इन्हीं संगीतकारों में AR Rahman एक ऐसी विभूति हैं जिन्होंने अपनी रचनाओं में पश्चिमी संगीत के मिश्रण से एक अनोखी शैली अपनाकर संगीत की दुनियां में तहलका मचा दिया है और आज वे भारत के पहले ऐसे संगीतकार हैं जिन्हें Academy Award और Grammy Award से भी सम्मानित किया जा चुका है।  AR Rahman के पिता तमिल एवं मलयालम फिल्मों में संगीत देते थे इसलिए इन्हें बचपन से ही संगीत का माहौल मिला। लेकिन जल्दी ही इनके सर से पिता का साया उठ गया। इसके बाद तो इनके परिवार पर मानों मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा। इनके पिता के वाद्य यंत्रों को किराये पर देकर इनकी माँ ने किसी तरह अपने परिवार की नैया को आगे बढ़ाया।  रहमान भी अपनी पढ़ाई-लिखाई छोड़, छोटे-मोटे Musical Band में काम करने लगे। इनकी प्रतिभा को देखते हुए मशहूर संगीतकार इलयाराजा ने इन्हें अपने साथ जोड़ लिया और मात्र 11 साल की उम्र में रहमान ने मलयालम फिल्मों से अपने संगीत का सफर शुरू किया।  तभी एक और...

बाल श्रमिकों की मुक्ति का मसीहा नोबेल शांति पुरुस्कार से सम्मानित

आधुनिक दौर के इस युग में बच्चों का शोषण एक गंभीर रूप ले चुका है। देश के कुल 14 करोड़ कामकाजी बच्चों में से लगभग आधे, बंधुआ मज़दूर क रूप में काम करते हैं।  विश्व में बच्चों पर होते इस दुर्व्यवहार ने मध्य प्रदेश के एक छोटे से शहर विदिशा के निवासी कैलाश सत्यार्थी को इस क़दर झकझोर दिया की उन्होंने उसी समय निश्चय कर लिया की वे संसार के अनाथ और बेसहारा बच्चों के विकास में ही अपना जीवन समर्पित कर देंगे। अपने इस जूनून को पूरा करने में इन्होंने अपनी इंजीनियरिंग की डिग्री को भी चिंता नहीं की। इन्होंने सबसे पहले बंधुआ बाल मजदूरों की स्थिति का अध्यन किया, फिर अपने आपको संगठित कर और स्थानीय प्रशासन से सहायता लेकर अवैध बाल श्रमिक केंद्रों पर छापे भी मारे जिसके लिए इन्हें कई धमकियां भी मिलीं। लेकिन बिना अपनी जान की परवाह किये इन्होंने उन बच्चों को मुक्त कराकर उन्हें विस्थापित करना शुरू किया। इनके मुहीम से प्रभावित होकर समाज के कई संगठनों ने आगे बढ़कर इनकी सहायता करनी शुरू की जिसने इन्हें और भी मज़बूती दी।  इनके इस प्रयास को विशेष पहचान मिली इनके "बचपन बचाओ आंदोलन" से, जिसके तहत इन्होंने...