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An inspirational true story

Hindi story

नारायणमूर्ती के जीवन की एक सच्ची घटना 


मेरी पत्नी , “ आप कितनी देर अख़बार पढ़ते रहोगे , इधर आओ और अपनी प्यारी बेटी को नाश्ता करवाओ “ ।
मैंने अख़बार एक तरफ़ रखा और तेज़ी से सिंधु की तरफ़ गया ।
सिंधु घबराई हुई लग रही थी , उसकी आँखों में आँसू थे और उसकी माँ उसके सामने एक प्याला दही वाले चावल , curd rice लिए खड़ी थी ।
सिंधु एक अच्छी समझदार शांत स्वभाव की लड़की है ।
मेने दही वाले चावलों का प्याला अपने हाथ में लिया , “ बेटा तुम्हें पसंद नहीं हैं फिर भी कुछ चावल खा लो , अपने पापा की ख़ुशी के लिए “।
सिंधु कुछ शान्त हुई , अपने छोटे छोटे गुलाबी हाथों की पिछली साइड से आँसू पूँछें, “ ठीक हे, मैं ये दही वाले चावल खा लूँगी , थोड़े से नहीं पूरा प्याला खा लूँगी “ ।
सिंधु थोड़ा झिझकते हुए आगे बोली , “ पापा अगर मैं ये पूरा प्याला दही वाले चावल खा लूँगी तो क्या मैं जो माँगूँगी वह आप मुझे देंगें “?
मै बिना सोचे समझे , “ हाँ बेटा , अगर तुम पूरा प्याला दही वाले चावल खा लेंगी तो तुम जो माँगोगी मै तुम्हें दूँगा “।
सिंधु ने अपना छोटा सा गुलाबी सीधा हाथ मेरी तरफ़ बढ़ाया “ पापा , वायदा “ ।
मैंने उसके छोटे से गुलाबी हाथ को अपने हाथ से पकड़ा , “ हाँ बेटा वायदा “ ।
लेकिन जल्द ही ख़्याल आया , “ सिंधु बेटा , तुम कम्प्यूट या इसी तरह की कोई क़ीमती चीज़ मत माँगना , तुम्हारे पापा के पास इतने पैसे नहीं है “।
सिंधु , “ नहीं पापा मैं कोई क़ीमती चीज़ नहीं माँगूँगी “।
धीरे धीरे और बहुत तकलीफ़ से सिंधु ने पूरा प्याला दही वाले चावलों का खा लिया ।
मुझे अंदर ही अंदर अपनी पत्नी और अपनी माँ पर ग़ुस्सा भी आ रहा था कि वे ऐसा खाना सिंधु को क्यों देते हैं जो उसे नहीं पसन्द ।
ये सब होने के कुछ देर बाद सिंधु मेरे पास आयी , उम्मीद भरी निगाहों से मेरी तरफ़ देखते हुए , “ पापा मुझे इस रविवार अपने सर के सब बाल कटवाने हैं “|
'Dad, I want to have my head shaved off, this Sunday!' was her demand.
भयानक, मेरी पत्नी दूर से चिल्लाई , “ मेरी लड़की बिना बालों के ?
“ मेरे परिवार में ऐसा कभी नहीं हो एकता “, मेरी माँ दूर से कर्कशता से बोली । इस लड़की का दिमाग़ ख़राब हो गया है,
TV प्रोग्रामों ने हमारी संस्कृति का नाश कर दिया है ।
अब मेरी बारी थी , “ सिंधु बेटा , तुम और कुछ माँग लो , तुम हमारी भावनाओं को समझो , हमें तुम्हें बिना बालों के देखकर बहुत तकलीफ़ होगी ।
“ पापा आपने देखा था , दही वाले चावल खाने में मुझे कितनी तकलीफ़ हुई थी , फिर भी मैंने पूरा प्याला दही वाले चावल खाए थे “ सिंधु रो रही थी ।
“ और आपने मुझसे वायदा किया था कि मैं जो माँगूँगी आप मुझे देंगे । अब आप अपने वायदे से मुकर रहे हैं ।”
“ आपने ही तो मुझे राजा हरिसहचंद्र की कहानी सुनाई थी और बताया था की चाहे कुछ भी हो हमें अपना वायदा निभाना चाहिये “ ।
अब मेरी निर्णय लेने की बारी थी , “ वायदा ज़रूर निभाना होगा । सिंधु ने जो माँगा है वह उसे देना होगा “।
“ तुम्हारा दिमाग़ ख़राब हो गया है , “ मेरी माँ दूर से कर्कशता से बोली ।
“ नहीं , अगर आज हमने वायदा पूरा नहीं किया तो सिंधु सच्चाई की क़ीमत कभी नहीं सिख पाएगी ! सिंधु तुम्हारी इच्छा ज़रूर पूरी होगी “।
सिंधु बिना बालों के अपने गोल चेहरे और बड़ी बड़ी आँखो मैं अच्छी लग रही थी ।
सोमवार सुबह मैंने सिंधु को उसके स्कूल छोड़ा । मेरे लिए ये देखने लायक़ नज़ारा था । बिना बालों के मेरी सिंधु अपनी क्लास की तरफ़ जा रही थी । सिंधु ने मेरी तरफ़ मुड़कर देखा और हाथ हिलाया । मेने भी जवाब मैं हाथ हिलाया ।
तभी एक लड़का एक गाड़ी से नीचे उतारा , और ज़ोर से बोला , “ सिंधु रुको मैं भी आ रहा हूँ “।
जिसको देखकर मैं हैरान रह गया वह था उसका गंजा बिना बालों का सिर । “ शायद यह आजके ज़माने का फ़ैशन है “, मैंने सोचा ।
एक औरत गाड़ी से नीचे उतर कर मेरे पास आयी और कहने लगी , “ भाई साहब आपकी बेटी सिंधुजा महान है , सिंधुजा is indeed great “।
“ वह लड़का जो सिंधुजा के साथ चल रहा है , मेरा बेटा हरीश है और उसे केंसर cancer की बीमारी है “, उसने अपने आसुओं को किसी तरह रोकते हुए कहा ।
“ पिछले एक महीने हरीश स्कूल नहीं आ सका । उसके इलाज के दौरान chemotherapy के दुशप्रभाव के कारण उसके सब बाल झड़ गए । हरीश को डर था कि स्कूल में बच्चे उसका मज़ाक़ उड़ाएँगे , इस लिए उसने स्कूल जाने से मना कर दिया ।
****पिछले हफ़्ते सिंधुजा हरीश से मिलने हमारे घर आयी थी | उसने हरीश से वायदा किया कि वह ऐसा कोई उपाय करेगी , जिससे स्कूल में कोई भी बच्चा उसका मज़ाक़ नहीं उड़ाएगा |
“ लेकिन मैं सपने में भी नहीं सोच सकती थी कि इसके लिए सिंधुजा अपने बाल कटवा लेगी “।
“ भाईसाहब आप और आपकी पत्नी ख़ुशनसीब हैं कि आपको सिंधुजा जैसी बेटी मिली है “।
ये सब सुनकर मैं स्तब्ध रह गया । “ मेरी छोटी सी परी, तुमने मुझे आज ज़िन्दगी का सबसे बड़ा सबक़ सिखा दिया , “ निस्वार्थ प्रेम “।
My little Angel, you are teaching me how selfless real love is!'
इस धरती पर सबसे ख़ुश वह लोग नहीं हैं जो अपनी ख़ुशी के लिए जीते हैं , सबसे ख़ुश वो लोग हैं जो दूसरों की ख़ुशी के लिए जीते हैं ।
The happiest people on this planet are not those who live on their own terms but are those who change their terms for others!

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