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कभी सड़कों पर जिसने बलून बेचे, उसी ने खड़ी की भारत की सबसे बड़ी टायर कंपनी

Mrf tyres
हमारा देश अन्य विकासशील देशों की तुलना में स्वतंत्रता के पहले और बाद भी एक मामले में अत्यंत भाग्यशाली रहा की यहाँ के स्टील, सीमेंट, भारी इंजीनियरिंग, परिवहन और ऑटोमोबाइल टायर जैसे उद्योगों में विदेशी कंपनियों का वर्चस्व नहीं रहा, क्योंकि कुछ भारतीय उद्योगपति ऐसे थे जिन्होंने इस क्षेत्र में पहल करने का बीड़ा उठाया था। ऐसे ही एक अग्रणी थे एम. एम. मैमेन मेपिल्लई। जिन्होंने अपनी कंपनी MRF के जरिये भारतीय रबर उद्योग की स्थापना की जो आजतक अपनी स्थिति मज़बूत किये हुए है।
मैमेन केरल के सीरियन ईसाई परिवार में जन्मे थे। इनके पिता एक निजी बैंक चलाते थे और साथ ही समाचार पत्र का सञ्चालन भी करते थे। तत्कालीन त्रावणकोर की रियासत ने इनके कुछ विवादस्पद लेखों के कारण इन्हें कैद कर जेल भेज दिया था। जिसके कारण मैमेन जी का परिवार बड़ी मुश्किलों में पड़ गया था। उस समय मैमेन कॉलेज में थे। घर की जिम्मेदारियों को समझते हुए मैमेन अपने भाइयों के साथ छोटा-मोटा काम करने लगे। इन्होने अपने घर के अहाते में बलून बनाने की एक छोटी सी यूनिट डाली। यहाँ तक की खुद ही सड़कों पर जाकर उसकी बिक्री भी की। इस काम में ये अपनी मेहनत और ग्राहकों के प्रति मधुरता के कारण काफी सफल रहे। कुछ दिनों बाद इन्होने अपने चचेरे भाई के साथ मिलकर टायर रेट्रेडिंग का काम शुरू किया जो की बहुत बढ़िया चल निकला। अपने इस काम की प्रगति को देख इन्होने अपनी कंपनी MRF की नीव रखी। जिसमे शुरुआत में रेट्रेडिंग का ही काम होता था। इस काम ने धीरे-धीरे मार्केट में अपनी पकड़ मज़बूत कर ली। अब इनका ध्यान टायर बनाने की तरफ बढ़ा। उस समय Dunlop, Firestone और Good Year जैसे विदेशी कम्पनियाँ टायर उद्योग पर बुरी तरह हावी थीं, जो की भारत सरकार के लिए एक चिंता का विषय था। अतः सरकार ने भारतीय कंपनियों को आमंत्रित करना शुरू किया। जिसका फ़ायदा मैमेन जी को भरपूर मिला। अपनी स्थिति को मजबूत करने के लिए मैमेन जी ने अमेरिका की एक कंपनी Mansfield Tyre & Rubber Company के साथ मिलकर साल 1964 में इस अवसर का भरपूर प्रयोग किया। लेकिन एक साल के भीतर ही इन्हें पता चला की जिस टेक्नोलॉजी के साथ ये उत्पादन कर रहे थे, वो भारतीय सड़कों के काबिल ही नहीं। MRF की छवि को मौजूदा विदेशी कंपनियों ने बिगाड़ने में कोई कमी नहीं छोड़ी। इस बात को मैमेन जी ने सरकार के सामने रखा। सरकार ने इस बात की गंभीरता को समझते हुए सभी कंपनियों को अलग-अलग आर्डर देना शुरू किया जिसमे MRF को अधिक शेयर मिला। मैमेन व्यक्तिगत रूप से एक बहुत अच्छे आर्टिस्ट थे, उन्होंने ग्राहकों, खासतौर पर ट्रक ड्राइवरों से मिलकर कर उनकी मांग को समझा और विज्ञापन की सरताज Alyque Padamsee कंपनी से में MRF का विख्यात logo "MRF Muscle Man" बनाया जो की टायर की मजबूती का प्रतीक बना। इसके साथ ही MRF ने मोटर स्पोर्ट्स (Formula1), क्रिकेट अकादमी और क्रिकेट वर्ल्ड कप की स्पोंसर्शिप के जरिये भी अपनी मजबूती बढ़ायी। अपनी इन्हीं रणनीतियों, अपने उत्कृष्ट उत्पादन और ग्राहक की संतुष्टतता के चलते ही MRF आज भारत की सबसे विश्वसनीय और एक सफल टायर कंपनी बन पायी है।


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